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Monday, March 29, 2010

छतहार के होली गीत 12


सुमिरों सरोसती हरे-हरे
सुमिरों सरोसती हरे-हरे
हरि गुण गाए,गोविंद गुण गाए
सुमिरों सरोसती हरे-हरे
पहले सुमिरों मात-पिता को
पहले सुमिरों मात न रे
जिसने जनम दियो हैं आज
हरि गुण गाए, गोविंद गुण गाए
सुमिरों सरोसति हरे-हरे
दूजे सुमिरों धरति मात
दूजे सुमिरों धरति न रे
जिन पर धरे हैं आज
हरि गुण गाए,गोविंद गुण गाए
सुमिरों सरोसति हरे-हरे
तीसरे सुमिरों गुरू अपने को
तीसरे सुमिरों गुरू न रे
जिसने ज्ञान दियो हैं आज
हरि गुण गाए,गोविंद गुण गाए
सुमिरों सरोसती हरे-हरे
सौजन्य- श्री विजय कुमार मिश्र

1 comment:

  1. सुंदर। छतहार की याद आ गई।

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