आपसे निवेदन

आप चाहे छतहार में रहते हों या छतहार से बाहर, अगर आपका रिश्ता छतहार से है तो ये ब्लॉग आपका है। हम चाहते हैं कि आप छतहार के बारे में अपनी जानकारी, अपनी भावना, अपने विचार हमसे बांटें। आप अगर छतहार से बाहर रहते हैं और जिंदगी की आपाधापी में छतहार से आपका रिश्ता टूट चुका है तो हम चाहते हैं कि आप अपने बारे में हमें जानकारी भेजें ताकि ब्लॉग में हम उसे पोस्ट कर छतहार से आपका रिश्ता जोड़ सकें। हमारा मकसद इस ब्लॉग को छतहार का इनसाइक्लोपीडिया बनाना है। दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठा कोई शख्स छतहार के बारे में अगर कोई जानकारी चाहे तो उसे अपने गांव की पक्की सूचना मिल सके। ये आपके सहयोग के बगैर संभव नहीं है। हमें इस पते पर लिखे- hkmishra@indiatimes.com

Saturday, August 20, 2011

अन्ना के आंदोलन में छतहार की भागीदारी

अन्ना हजारे के आंदोलन में आज छतहार ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी। दिल्ली के रामलीला मैदान में जनलोकपाल बिल के लिए अनशन पर बैठे अन्ना हजारे को समर्थन देने के लिए छतहार निवासी श्री विजय कुमार मिश्र, श्री हिमांशु कुमार मिश्र, श्री दिव्यांशु भारद्वाज और श्रीमती संगीता अनशन स्थल पर पहुंचे। रामलीला मैदान से लौटकर श्री विजय कुमार मिश्र ने छतहार ब्लॉग को बताया कि लोगों का जोश देखकर वो अभिभूत हैं। अगर भ्रष्टाचार को खत्म करना है तो हर किसी को अन्ना का साथ देना होगा।
श्री विजय कुमार मिश्र
श्री दिव्यांशु भारद्वाज


इस बीच, छतहार से जानकारी मिली है कि वहां भी अन्ना के समर्थन में धरने की तैयारी हो रही है। आज छतहार से सटे तारापुर में अन्ना के समर्थन में एक रैली निकाली गई, जिसमें सभी दलों के लोग शामिल हुए। छतहार की तरफ से मुखिया श्री मनोज मिश्र इस रैली में शामिल हुए।
अगर आप अन्ना के साथ हैं तो ब्लॉग पर अपनी प्रतिक्रिया भेजें। अगर आप भी अन्ना के आंदोलन में शामिल हो रहे हैं तो अपनी तस्वीर भी जरूर भेजें। यहां प्रकाशित कर हमें प्रसन्नता होगी।  

Saturday, August 13, 2011

पाठा बलि को सशर्त मंजूरी

तेलडीहा में जिला प्रशासन ने दुर्गापूजा के दौरान पाठा बलि को सशर्त मंजूरी दे दी है। बांका की सांसद श्रीमती पुतुल सिंह के हस्तक्षेप के बाद गत सोमवार को प्रशासन ने अपना फैसला सुनाया। प्रशासन ने कहा है कि पशु बलि के लिए सभी मंदिरों में पूजा समिति का विधिवत गठन कर इसकी जानकारी प्रशासन को दी जाएगी। इसी समिति की देखरेख में पशु बलि का कार्यक्रम संपन्न होगा। इस दौरान किसी प्रकार की घटना होने पर पूजा समिति के ऊपर भी इसकी जिम्मेवारी होगी। जरूरत पड़ने पर प्रशासन भी पूजा समिति को इसमें सहयोग करेगा।
सोमवार को अनुमंडल पदाधिकारी अमित कुमार ने इसे लेकर पूजा समिति के लोगों के लोगों के साथ बैठक की। उन्होंने बलि पड़ने वाले सभी मंदिरों में
16 अगस्त से पहले पूजा समिति गठित कर लेने को कहा गया। साथ ही बलि के लिए सभी पूजा समिति अपना कार्यकर्ता तैयार करेंगे जिन्हें पशु बलि के दौरान परिचय पत्र भी दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं की सूची को स्थानीय थानेदार अंतिम रूप से स्वीकृति प्रदान करेंगे। इसका रिकार्ड पूजा समिति के साथ थाना के पास भी जमा रहेगा। इन शर्त के साथ पशु बलि सभी सार्वजनिक जगहों पर पहले की तरह जारी रहेगा।
बैठक में तेलडीहा मंदिर में दशहरा पर बलि को लेकर विशेष व्यवस्था का निर्णय हुआ, ताकि पिछली साल जैसी घटना किसी कीमत ना हो सके। एसडीओ ने शंभूगंज के सीओ और थानाध्यक्ष को इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। बैठक में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रमाशंकर राय, शंभूगंज थानाध्यक्ष बासुकीनाथ झा, बांका थानाध्यक्ष अरूण कुमार राय सहित पूजा समिति के मुखिया मनोज कुमार मिश्रा, शंकर दास, विजय कुमार दास, अमूल दास, कमल किशोर दास, सच्चिानंद झा कई पूजा समिति के लोग उपस्थित थे।
गौरतलब है कि पिछले साल दुर्गापूजा में नवमी पूजा में बलि के दौरान भगदड़ में कुछ लोगों की मौत हो गई थी। इसके प्रशासन ने पूरे जिले में बलि पर रोक लगा दी थी। चार अगस्त को नागपंचमी के मौके पर शंभूगंज प्रखंड के हरिवंशपुर विषहरी मंदिर में हर साल की तरह करीब दो सौ पाठा की बलि दी जानी थी। इसके लिए सुबह दूर दराज गांवों से करीब सौ की संख्या में बलि के लिए पाठा लेकर भी भक्त पहुंचे हुए थे। इसकी सूचना पर अंचलाधिकारी इंद्रजीत सिंह व थानाध्यक्ष बासुकीनाथ झा ने पुलिस बलों के साथ वहां पहुंच कर बलि को रोक दिया। अधिकारियों ने उन्हें पूजा पर किसी प्रकार की बाधा नहीं होने देने का आश्वासन दिया। प्रशासन के इस फैसले की खबर पर आसपास गांवों के सैकड़ों लोग वहां जमा हो गये तथा प्रशासन के इस फैसले को तुगलकी करार दिया। बाद में उपस्थित लोगों ने मंदिर में पूजा किये जाने से भी इंकार कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि तांत्रिक विषहरी मंदिर में पिछले चार सौ वर्षो से पूरे क्षेत्र की आस्था जुड़ी हुई है। लोग तब से यहां पशु बलि दे रहे हैं। लेकिन इसे एका एक रोकना सही नहीं है।
(कुछ इनपुट- दैनिक जागरण से)

Friday, July 29, 2011

मुखियाजी का जनता दरबार



छतहार माध्यमिक विद्यालय में मुखिया श्री मनोज मिश्र लोगों की समस्या का निपटारा करते हुए। फोटो- रौशन मिश्र

Saturday, July 16, 2011

तीन मौतों से शाकद्वीपीय टोले में शोक

तीन दिन के भीतर तीन लोगों की मौत से छतहार के शाकद्वीपीय टोले में शोक फैल गया है। नौ जुलाई को श्री भोले मिश्र की पत्नी (पुटुक्की मिश्र की मां) का निधन हुआ। अगले रोज श्री सच्चिदानंद मिश्र भी लंबी बीमारी के बाद स्वर्ग सिधार गए। दो दिन के भीतर दो मौत के सदमे से शाकद्वीपीय समाज अभी उबरा भी नहीं था कि बोकारो से श्री महानंद मिश्र के निधन की खबर आ गई। श्री महानंद मिश्र की उम्र करीब 55 साल की थी और वो बोकारो में कार्यरत थे। छतहार ब्लॉग की तरफ तीनों मृतात्माओं को हार्दिक श्रद्धांजलि। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और मृतकों के घरवालों को दुख से लड़ने का साहस दे।

Saturday, May 28, 2011

जनता का सेवक हूं, कर्म ही पूजा है-मनोज मिश्र

पंचायत चुनाव में मुखिया पद पर लगातार तीसरी बार चुने जाने पर श्री मनोज मिश्र से पंचायत के तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया है। जीत के बाद छतहार ब्लॉग से एक्सक्लूसिव बातचीत में श्री मिश्र ने कहा कि वो जनता के सेवक हैं और कर्म ही उनकी पूजा है। वो पिछले दस सालों की तरह नए कार्यकाल में भी छतहार पंचायत के विकास के लिए तन-मन से काम करते रहेंगे।
श्री मिश्र ने कहा है कि उनका सपना छतहार पंचायत को देश के सबसे विकसित पंचायत के रूप में देखना चाहते हैं। इसके लिए वो जीत-तोड़ मेहनत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सरकार से पंचायतों को और मदद देने की अपील की है। श्री मिश्र लगातार तीसरी बार मुखिया बन रहे हैं लेकिन इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद उनके पांव अभी भी धरती पर टिके हैं। उन्होंने कहा कि जीत का मतलब ये नहीं जनता ने पांच साल के लिए राज चलाने का लाइसेंस दे दिया है। जीत सच्ची तभी कही जाएगी जब वो अपने काम के बूते जनता भरोसा कायम रखने में कामयाब रहेंगे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने उन्हें वोट दिया और जिन्होंने उनका विरोध किया.. सबका वो शुक्रिया अदा करते हैं क्योंकि समर्थकों से काम करने की ऊर्जा मिलती है और विरोधियों से खुद को साबित करने की चुनौती। उनकी कामयाबी का यही राज है।
श्री मिश्र ने अपनी जीत के लिए जनता के साथ खासतौर पर अपनी कोर टीम के सदस्यों का शुक्रिया अदा किया। श्री मिश्र की टीम में श्री पंकज सिंह, श्री ब्रजेश मिश्र, श्री पवनानंद मिश्र, श्री दीपक सिंह, श्री मोनू मिश्र, श्री पप्पू यादव, श्री प्रकाश चौधरी, श्री छेदी चौबे, श्री बुटेरी चौधरी, श्री लखन चौधरी, श्री अजय मिश्र उर्फ नौसे, श्री शंकर तिवारी,श्री अशोक यादव, श्री श्रीकांत यादव,श्री हीरा दास, श्री कपिल दास,श्री शेखर झा, श्री प्रमोद झा, मिर्जापुर से श्री प्राणमणि मिश्र, श्री यशोधर पाठक आदि प्रमुख हैं।
श्री मिश्र के तीसरी बार मुखिया चुने जाने पर छतहार ब्लॉग पर उनके लिए लगातार बधाई संदेश आ रहे हैं। बेगूसराय से श्री मनोज कुमार मिश्र ने अपने संदेश में लिखा है-बधाई! यूं ही पंचायत का विकास करते रहिए। नोएडा में फैशन डिजाइनिंग का काम करने वाले श्री विकास मिश्र ने कहा- मनोज दा के रूप में जनता ने  अपना सच्चा नुमाइंदा पा लिया है। जीत की हार्दिक बधाई। नाइजीरिया से छतहार निवासी पंकज मिश्र ने कहा है हमें मनोज जी पर गर्व है। गाजियाबाद में रहने वाले छतहार के छात्र नीरज, सौरभ और आशीष ने भी मनोज जी के मुखिया चुने पर बधाई दी है।

ब्रेकिंग न्यूज- मनोज मिश्र की हैट्रिक

छतहार पंचाय़त चुनाव का नतीजा आ गया है। शंभूगंज से अभी-अभी खबर मिली है कि वर्तमान मुखिया श्री मनोज मिश्र भारी बहुमत से चुनाव जीत गए हैं। बतौर मुखिय़ा ये उनकी लगातार तीसरी जीत है। श्री मनोज मिश्र ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी विनय खिरहरी को 404 वोटों से मात दी। श्री मिश्र को 1297 वोट मिले, जबकि श्री खिरहरी 893 वोट ही हासिल कर पाए। पंचायत समिति में जीवन सिंह 24 वोट से विजयी रहे। श्री जीवन पंचायत समिति के चुनाव में दूसरी बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। सरपंच पद पर प्रभाकर मंडल को जीत मिली।
जहा तक श्री मनोज मिश्र का सवाल है, क्षेत्र में उनकी ख्याति एक कर्मठ व्यक्ति के रूप में की जाती है। वो बेहद जुझारू किस्म के इंसान माने जाते हैं, जिनके लिए मुखिया पद का मकसद सिर्फ और सिर्फ पंचायत का विकास और गरीब-पिछड़ों को बुनियादी सुविधा देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने पहली बार मुखिया पद का चुनाव 2001 में जीता था, जब लंबे अर्से बाद बिहार में पंचायत चुनाव हुआ था।तब उन्होंने मुखिया पद पर लंबे अर्से से कायम श्री नंद किशोर सिंह को मात दी थी। नंद बाबू की ख्याति पंचायत के बड़े स्तंभ के रूप में की जाती थी,लेकिन पंचायत के विकास की लंबे अर्से तक अनदेखी और नए जोश के रूप में श्री मनोज मिश्र के उदय ने छतहार पंचायत में नंद बाबू के दबदबे को खत्म कर दिया।
2001 में मुखिया पद संभालते ही श्री मनोज मिश्र के सामने पहली चुनौती थी पंचायत संस्था में ग्रामीणों का भरोसा वापस दिलाना। उन्होंने सत्ता संभालते ही पंचायत के लिए सरकारी स्तर पर शुरू की गई तमाम योजनाओं को अमली जामा पहनाना शुरू किया। देखते ही देखते गांव में विकास की धारा बहने लगी। टूटी सड़कें पक्की हो गई हैं। मुख्य सड़क से मुहल्लों तक जाने वाली तंग गलियां चौड़ी और ईंट की हो गई। पानी की निकासी के लिए नाले का काम पूरा किया गया। छतहार के गौरव माध्यमिक विद्यालय का कायकल्प किया गया। ना सिर्फ स्कूल में नई इमारतें खड़ी हुईं बल्कि शिक्षकों की मौजूदगी भी सुनिश्चित कराई  गई। ये मुखिया जी की मेहनत का ही नतीजा है आज छतहार स्कूल  अपना पुराना गौरव वापस सका।
छात्रों की सुविधा के लिए शहीद विश्वनाथ पुस्तकालय को फाइलों से निकालकर जमीन पर लाया गया। आज कोई  भी देख सकता है कि किस तरह राय टोली के पास शहीद विश्वनाथ गर्व से सीना ताने खड़ा है।
केंद्र और राज्य सरकार की मदद के शुरू गई मध्यान्ह भोजन योजना को सख्ती से छतहार पंचायत में लागू किया गया। आंगनबाड़ी योजना भले ही दूसरे पंचायतों में मुखिया और पंचायत सदस्यों की कमाई का जरिया बन गयी हो, लेकिन छतहार में ये योजना अभी भी कारगर तरीके से काम कर रही है। कुल मिलाकर महज पांच साल में श्री मनोज मिश्र के नेतृत्व में छतहार में वो हो गया, जिसकी कल्पना आजादी के  बाद से 2001 तक किसी ने नहीं की थी। ये काम का ही नतीजा था जब श्री मिश्र 2006 पंचायत चुनाव में खड़े हुए तो भारी बहुमत से वापस जीत कर आए।
दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने छतहार पंचायत में सरकार की कई योजनाएं लागू कीं। राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी योजना नरेगा  अगर कहीं अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में काम कर रही है तो वो छतहार पंचायत ही है। गर्भवती महिलाओं, कुपोषित शिशुओं, मेधावी छात्रों तमाम लोगों के लिए जितनी भी सरकारी योजनाएं हैं वो बगैर किसी घोटाले के छतहार पंचायत में काम कर रही हैं। कुल मिलाकर श्री मनोज मिश्र छतहार के विकासपुरुष साबित हुए हैं। तभी तो बगैर किसी धनबल और जातिगत आधार के पंचायत चुनाव में वो जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे। छतहार ब्लॉग की तरफ से श्री मनोज मिश्र जीत की हार्दिक बधाई। हम कामना करते हैं छतहार के विकास में वो निरंतर काम करतके रहेंगे।