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Saturday, May 28, 2011

जनता का सेवक हूं, कर्म ही पूजा है-मनोज मिश्र

पंचायत चुनाव में मुखिया पद पर लगातार तीसरी बार चुने जाने पर श्री मनोज मिश्र से पंचायत के तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया है। जीत के बाद छतहार ब्लॉग से एक्सक्लूसिव बातचीत में श्री मिश्र ने कहा कि वो जनता के सेवक हैं और कर्म ही उनकी पूजा है। वो पिछले दस सालों की तरह नए कार्यकाल में भी छतहार पंचायत के विकास के लिए तन-मन से काम करते रहेंगे।
श्री मिश्र ने कहा है कि उनका सपना छतहार पंचायत को देश के सबसे विकसित पंचायत के रूप में देखना चाहते हैं। इसके लिए वो जीत-तोड़ मेहनत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सरकार से पंचायतों को और मदद देने की अपील की है। श्री मिश्र लगातार तीसरी बार मुखिया बन रहे हैं लेकिन इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद उनके पांव अभी भी धरती पर टिके हैं। उन्होंने कहा कि जीत का मतलब ये नहीं जनता ने पांच साल के लिए राज चलाने का लाइसेंस दे दिया है। जीत सच्ची तभी कही जाएगी जब वो अपने काम के बूते जनता भरोसा कायम रखने में कामयाब रहेंगे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने उन्हें वोट दिया और जिन्होंने उनका विरोध किया.. सबका वो शुक्रिया अदा करते हैं क्योंकि समर्थकों से काम करने की ऊर्जा मिलती है और विरोधियों से खुद को साबित करने की चुनौती। उनकी कामयाबी का यही राज है।
श्री मिश्र ने अपनी जीत के लिए जनता के साथ खासतौर पर अपनी कोर टीम के सदस्यों का शुक्रिया अदा किया। श्री मिश्र की टीम में श्री पंकज सिंह, श्री ब्रजेश मिश्र, श्री पवनानंद मिश्र, श्री दीपक सिंह, श्री मोनू मिश्र, श्री पप्पू यादव, श्री प्रकाश चौधरी, श्री छेदी चौबे, श्री बुटेरी चौधरी, श्री लखन चौधरी, श्री अजय मिश्र उर्फ नौसे, श्री शंकर तिवारी,श्री अशोक यादव, श्री श्रीकांत यादव,श्री हीरा दास, श्री कपिल दास,श्री शेखर झा, श्री प्रमोद झा, मिर्जापुर से श्री प्राणमणि मिश्र, श्री यशोधर पाठक आदि प्रमुख हैं।
श्री मिश्र के तीसरी बार मुखिया चुने जाने पर छतहार ब्लॉग पर उनके लिए लगातार बधाई संदेश आ रहे हैं। बेगूसराय से श्री मनोज कुमार मिश्र ने अपने संदेश में लिखा है-बधाई! यूं ही पंचायत का विकास करते रहिए। नोएडा में फैशन डिजाइनिंग का काम करने वाले श्री विकास मिश्र ने कहा- मनोज दा के रूप में जनता ने  अपना सच्चा नुमाइंदा पा लिया है। जीत की हार्दिक बधाई। नाइजीरिया से छतहार निवासी पंकज मिश्र ने कहा है हमें मनोज जी पर गर्व है। गाजियाबाद में रहने वाले छतहार के छात्र नीरज, सौरभ और आशीष ने भी मनोज जी के मुखिया चुने पर बधाई दी है।

Saturday, March 19, 2011

मुखियाजी ने नामांकन भरा

समर्थकों के भारी हुजूम के बीच मौजूदा मुखिया श्री मनोज मिश्रा ने तीन मई को होने वाले पंचायत चुनाव के लिए अपना पर्चा दाखिल कर दिया। श्री मनोज मिश्रा ने अपना नामांकन शंभूगंज में दाखिल किया। इस मौके पर छतहार, टीना, मालडा, तिलडीहा आदि गांवों से करीब पांच सौ लोग शंभूगंज पहुंचे थे। श्री मिश्र पिछले दो टर्म से मुखिया पद से निर्वाचित हो रहे हैं। इस बार वो जीत की हैट्रिक के लिए फिर मैदान में हैं।

Sunday, June 20, 2010

छतहार के फनकार- मनोज मिश्र

यूं तो छतहार की धरती ने कई फनकार पैदा किए, लेकिन जो शोहरत और कामयाबी मनोज मिश्र ने हासिल की वो काबिलेतारीफ है। छतहार के फनकारों की कोई भी सूची मनोज जी के जिक्र के बगैर अधूरी होगी। चाहे वो गज़ल गायिकी हो या फिर लोकगीत, मनोज जी को दोनों में महारत हासिल है। जिंदगी की दूसरी जिम्मेदारियों की वजह से पिछले पंद्रह साल से वो गीत-संगीत से दूर हैं, लेकिन उन्होंने हमसे वादा किया है कि वो अब गीत-संगीत से अपना वनवास तोड़ेंगे। हमारी दुआ उनके साथ है। तहे दिल से हम दुआ करेंगे छतहार का जो चमकता संगीत सितारा अचानक बादलों में घिर गया था वो फिर धूमकेतु की तरह चमके।
यहां पेश है एक गजल और दो लोकगीत जिसे मनोज जी ने ना सिर्फ स्वर दिया है बल्कि संगीत भी दिया है। ये गीत कश्ती के मुसाफिर अलबम से है, जो नए दशक की शुरुआत में बिहार में बेहद लोकप्रिय रहा था। गीतकार हैं ज्योतिंद्र नाथ मिश्र और गायन में मनोजजी का साथ दिया है प्रियंका गहरबार ने।

चांदनी रात में हर फूल मुस्कुराया है
ऐसा लगता है, बहारों ने सर उठाया है
हसीन लम्हों से भरी आंखें, इस तरह अपनी
दर्द सीने से उतर सरजमीं पे आया है
आप हैं चांद है चांदनी रात है
बात करते रहें तो क्या बात है।
आइये दो कदम हम मिलके चलें
पा पा पा मा मा मा गा गा गा रे रे रे
गा गा गा रे रे रे सा पा धि ना सा सा नि सा सा
नि रे रे नि सा सा पा धा नि सा सा पा धा नि सा सा
आइये दो कदम हम मिल कर चलें
फिर भटकते रहें तो क्या बात है।
आप हैं चांद है....
सुलगते हुए एक जंग से हम
गुजरते रहें तो क्या बात है
आप हैं चांद है...
जिंदगी दर्द का दूसरा नाम है
पा पा पा मा मा मा गा गा गा रे रे रे
गा पा गा पा गा रे सा
जिंदगी दर्द का दूसरा नाम है
मुस्कुराते रहें तो क्या बात है
आप हैं चांद है

साल २००० में कश्ती के मुसाफिर अलबम की रिकार्डिंग के दौरान पटना स्टूडियो में ली गई तस्वीर। सामने की पंक्ति में बाएं से चौथे हैं मनोज मिश्र। उनकी बायीं तरफ गायिका प्रियंका जबकि उनके ठीक पीछे खड़े हैं गीतकार ज्योतिंद्रनाथ मिश्र।
अंगिका गीत- गोरी के शान
गीतकार- ज्योतिंद्रनाथ मिश्र
गायक और संगीतकार- मनोज मिश्र
पटना दूरदर्शन पर ये गीत 2005 में प्रसारित हो चुका है
(ये गांव के एक पति के दिल का दर्द है, जिसकी पत्नी के पास रूप तो है लेकिन गुण नहीं)
तोरा ऐसन शान गे गोरकी, कत्ते के देखलियै
ऐसन तीर कमान गे गोरी कत्ते के देखलियै
बोली तोर तबल दूध सन, देलकैय जीभ जराय
सउसे मुंह में फोंका होय गेल, तरुवो गेलै छिलाय
मुंह में रखनै पान गे गोरकी कत्तै के देखलियै
ऐसन तीर कमान गे गोरी कत्ते के देखलियै
तोरा ऐसन...
ऐना कंघी आगू रहै छौ, पीछू सुनै छैं बात
डबकते डबकते जरी गेलौ, फेरु भंसा के भात
ऐसन तीर कमान गे गोरकी...
रंग बिरंगा सारी किनैय छैं, फटलै हमरो जुत्ता
बढ़लै ढाड़ी बाल देखी के, पीछू भूंके कुत्ता
मधुर मधुर मुस्कान गे गोरकी कत्तै के देखलियै
तोरा ऐसान शान गोरी के
रात रात भर जागल रहै छी, लागौ तोरा नींद

खटिया चढ़ी के मचकै छें तों, हमरा मिलल जमीन
ऐसन तीर तमान...
सोलह सोमबारी के फल छौ, ऐसन मिललौ दूल्हा
गोतनी के साथ तों टीवी देखैं छैं, हम्में फूकौं चूल्हा
मधु-मधुर मुस्कान गे गोरकी...

1992 में दुमका, एंड के शारदा संगीत महाविद्यालय में कार्यक्रम पेश करते मनोज मिश्र
गीत- डर लागै
गीतकार- ज्योतिंद्र नाथ मिश्र
गायक और संगीतकार- मनोज मिश्र
(नौकरी के लिए शहर जा रहे पति को उसकी बीवी किस तरह रोकती है उसकी बानगी है ये लोकगीत)

डर लागै हो सैंया डर लागे
तोरा सूनी रे मड़ैय़ा में डर लागे
पति कहता है-
जिसके पूरे घर में भरा पूरा परिवार हो उसे डर कैसे
तुम्हारी सासु मां हैं प्यारी ननद है छबीले देवरजी हैं फिर डर कैसा?
पत्नी बोलती है
सासु हमारी बड़ी है पुरानी, दिनभर मांगे हुक्का पानी
बतिया उनकी जहर लागे
तोरा सुनी रे मड़ैया में डर लागे
कुंवारी ननदिया के लंबी-लंबी केसिया
हंसे जैसे हंसुआ के धार जैसन हसिया
दिन दुपहरिया कहर लागे
तोरा सूनी रे मड़ैया में डर लागे
छैल छबीला मोरा बांका देवरवा
हमको जगायके खेले सतघरवा
अंखिया मारे हो हो हो
अंखिया मारे नजर लागे
तोरा सूनी रे मड़ैया में डर लागे
अब ना रहबै हम तोहरी अटरिया
ले लैयो सैंया झोरी गठरिया
दुश्मन सारा हो हो हो
दुश्मन सारा शहर लागे
तोरा सूनी रे मड़ैया में डर लागे

Saturday, June 12, 2010

मदमस्त के बहे बयार महिनवा फागुन के

मदमस्त के बहे बयार महिनवा फागुन के
बाटे रे बटोहिया तोहिं मोरो भैया
लेले जाहो हमरो संदेश, महिनवा फागुन के
मदमस्त के बहे बयार महिनवा फागुन के
सबके बलमुआं घर घर घूमे
हमरो बलमू परदेस, हे हो
हमरो बलमू परदेस महिनवा फागुन के
मदमस्त के बहे बयार महिनवा फागुन के
तोहरो बलमुआं के चिन्हियो ना जानियो
कैसे के कहब संदेश हे हो
कैसे के कहब संदेश महिनवा फागुन के
मदमस्त के बहे बयार महिनवा फागुन के
सबके बलमुआं के लंबी लंबी केशिया
हमरे के पगिया निशान, महिनवा फागुन के
मदमस्त के बहे बयार महिनवा फागुन के

- बेशक ये मौसम फागुन का नहीं है, लेकिन अगर आप अपनों से दूर रहते हैं तो जेठ में भी ये फागुन जैसा असर करता है। सबके बलमुआ घर-घर घूमे, हमरो बलमुआ परदेस.... यहां बलमुआ की जगह किसी अपने को रख कर देखिये, जिसे अ्पने प्यारे गांव छतहार से दूर बैठे आप मिस कर रहों तो ये गीत आपके मन की संवेदना के तार को झंकृत कर देगी।
होली का ये सुंदर गीत हमें भेजा है श्री मनोज मिश्र ने। मनोज जी छतहार के जाने-माने गायक और संगीतकार हैं। संप्रति बरौनी के आईओसीएल रिफाइनरी में सर्विस इंजीनियर पद पर कार्यरत हैं। मनोज जी से हम उम्मीद करेंगे कि आगे भी वो अपनी रचना और छतहार के गीत-संगीत के माहौल के साथ वहां के कालजयी कलाकारों के बारे में अपना लेख भेजने की कोशिश करेंगे।- मॉडरेटर