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Sunday, January 15, 2012

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं

छतहार के समस्त निवासियों और छतहार ब्लॉग के पाठकों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।
मकर संक्रांति पर्व को सूर्य देव की आराधना और अच्छी खेती के लिए भगवान को धन्यवाद देने के पर्व के रूप में देश भर में विभिन्न नामों से मनाया जाता है। इस दिन सूर्य दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर बढ़ना शुरू करता है। इसे आम लोगों और कृषि प्रधान देश भारत की कृषि के लिए अच्छा संकेत माना जाता है। राज्य चाहे कोई भी हो, इस पर्व का महत्व सबसे ज्यादा किसानों में होता है।
श्रृंगार रस के कवियों के लिए 'वसंत ऋतु' कविताओं की कल्पना की उड़ान के लिए सबसे सही मौसम होता है। इस ऋतु में नई फसल में फूल और फल आने शुरू होते हैं तो दूसरी ओर फूलों की क्यारियों में तरह-तरह के फूलों की मंत्रमुग्ध करने वाली सुगंध बिखरने लगती है। अतः इस पर्व को वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है।
इस पर्व की पावनता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि महाभारत काल में महान योद्धा और प्रतिज्ञा के धनी पितामह भीष्म ने मृत्यु का वरण करने के लिए बाणों की शैय्या पर पड़े-पड़े इंतजार किया था। कृषि से जुड़ा त्योहार होने के कारण कई जगह कृषि यंत्रों की पूजा भी की जाती है। इस दिन गंगा स्नान कर सूर्य की उपासना और गंगाजल से सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।


खास बात यह कि इस दिन से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। यानी मकर रेखा के बिलकुल ऊपर होता है। वहाँ से धीरे-धीरे मेष राशि में प्रवेश करने के बाद छह महीने बाद कर्क राशि में प्रवेश करता है। इसी के आधार पर ऋतु परिवर्तन होता है। मकर संक्रांति के दिन से उत्तरायण में दिन का समय बढ़ना और रात्रि का समय घटना शुरू हो जाता है।
कई राज्यों में इस दिन अलग-अलग राज्यों में तिल-गुड़ की गजक, रेवड़ी, लड्डू खाने और उपहार में देने की परंपरा भी है। चावल बाहुल्य वाले बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में इस पर्व को ' खिचड़ी' या 'खिचराईं' के नाम से मनाया जाता है। पूर्वी उत्तरप्रदेश और तमिलनाडु में इस दिन खिचड़ी पकाई और खाई जाती है। कई जगह दाल और चावल दान करने की परंपरा है। जबकि पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कई स्थानों पर बाजरे की खिचड़ी पकाई और खाई जाती है।                                  साभार- वेब दुनिया

Saturday, January 7, 2012

नए साल पर दो अच्छी खबर

साल 2012 आप सबके लिए दो अच्छी खबर लेकर आया है। दोनों खबरें रेलवे से संबंधित हैं। भागलपुर-दिल्ली के बीच चलने वाली साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव अब सुल्तानगंज कर दिया गया है। पहले ये ट्रेन सुल्तानगंज में नहीं रुकती थी, जिससे छतहार, तारापुर और इलाके को हजारों लोग इस ट्रेन का उपयोग नहीं कर पाते थे।
दूसरी खबर, गया हावड़ा ट्रेन से संबंधित है। इसमें अब एसी डिब्बा जोड़ दिया गया है।  

Sunday, November 13, 2011

बदलेगा अब सुल्तानगंज स्टेशन का नाम

चाहे दिल्ली से छतहार जाना हो या मुंबई से। चाहे पटना से ट्रेन पकड़े हों या कोलकाता से। छतहार जाने के लिए आपको उतरना तो पड़ेगा सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर ही। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जल्द सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन की हस्ती मिटने वाली है। अब कोई सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन नहीं होगा। ना.. ना.. ना... ऐसा नहीं है कि सुल्तानगंज से रेलवे स्टेशन ही खत्म होने वाला है, बल्कि रेलवे मंत्रालय ने इस स्टेशन का नाम बदलने का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक इस स्टेशन का नाम मशहूर अजगैबीनाथ के नाम पर अजगैबीनाथ धाम स्टेशन किया जाएगा। छतहार ब्लॉग की ये एक्सक्लूसिव खबर है।

Saturday, October 15, 2011

नीतीश कुमार को खुला खत

आदरणीय नीतीश कुमार जी।
आपके सुशासन की बड़ी तारीफ सुनी थी। देश की मीडिया में सुर्खियां बन रही थीं आपका विकास मॉडल। भारतीय रेल के कायाकल्प में आपके पूर्ववर्ती लालू प्रसाद यादव के प्रबंधन मॉडल की तरह देश के शीर्ष मैनेजमेंट कॉलेजों में आपके प्रबंधन मॉडल पर बहस होने लगी थी। इन्हीं चर्चाओं के बूते आप बिहार में भारी बहुमत से दूसरी बार सत्ता में भी आए। बिहार के छोटे से अपने गांव से सैकड़ों मील दूर दिल्ली में बैठकर मुझे आपके सुशासन की इन तारीफों से बड़ी खुशी हो रही थी। गर्व हो रहा था कि चलो कम से कम अच्छी वजहों से सूबे से बाहर बिहार की तारीफ तो हो रही है। नहीं तो अब तक दिल्ली में बिहारी शब्द का मतलब क्या होता था इसका दर्द हम प्रवासी बिहार वाले ही जानते हैं। खैर, सुशासन के इन चर्चों को सुनते हुए मन बेसब्री से इंतजार कर रहा था बदले बिहार को देखने का। मन में बड़ी कुलबुलाहट हो रही थी कि तारापुर से अपने गांव जाने वाली सड़क का हाल देखने की, जो पिछले 25 सालों में विकास की उल्टी रफ्तार पर चल रही थी। मुझे याद है 1987-88 में बड़ुवा नदी पर महत्वाकांक्षी पुल बनकर तैयार हुआ था। तब हम अपने कार वाले रिश्तेदारों को गर्व से बताया करते थे कि चिंता के कौनो बात नै छय... अब त घर तक गाड़ी आबै छैय...1990 तक आते-आते तारापुर से छतहार तक चमचमाती पक्की सड़कें बनकर तैयार हो चुकी थीं।
लेकिन, लगता है आने वाला वक्त छतहारवालों पर बेरहम था। लालू शासन में पूरे बिहार की तरह तारापुर-छतहार की सड़क ने भी दम तोड़ दिया। आप ऊपर तस्वीरों में देख रखते हैं सड़क का हाल। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ये सड़क छतहार ही नहीं मालडा, गुलनीकुशहा, खौजरी, टीना, मिर्जापुर समेत कई गांवों के हजारों लोगों का जरिया है करीबी शहर तारापुर पहुंचने का।
खैर, लालू काल में सड़कें टूटती रहीं... परेशानियां बढ़ती रहीं.. लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। सुध लेता भी कौन पूरे बिहार का तब यही हाल तो था। बहरहाल, सुशासन के वादे के साथ आप सत्ता में आए। पूरे बिहार में कथित तौर पर सड़कों पर काम शुरू हो गया। बिहार से खबरें आने लगीं कि अब बिहार पहले वाला नहीं रहा। नीतीशजी खूब काम करा रहे हैं। पांच साल में बिहार बदल जाएगा।
मन में खुशी हुई। जब भी गांव किसी को फोन करता पूछता गांव की सड़क पर काम शुरू हुआ क्या? जवाब में हर बार ना ही मिला। सुशासन का सब्जबाग दिखाते-दिखाते आपने पांच साल पूरे कर लिए। कुछ जगहों पर सड़कें बनीं... और हमारे गांव की तरह ज्यादातर हिस्सों में बेबसी बनी रही। चुनाव आया। आपने नारा दिया कुछ तो किया। जनता ने भरोसा किया और आपको भारी बहुमत मिल गया। लेकिन, नीतीश जी आपके दूसरे कार्यकाल का सालभर होने को है और मैं आपको आपके तथाकथित सुशासन की कुछ तस्वीरें दिखाना चाहता हूं। उम्मीद है आप इस पर गौर करेंगे।
नीतीशजी, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं ये बड़ुवा पुल को छतहार से जोड़ने वाली तस्वीर है। बताने की जरुरत नहीं कि सड़क दोनों तरफ से बुरी तरह कटी हुई है और यहां थोड़ा भी संतुलन खोने का मतलब है बड़ा हादसा। गौर से आप देखेंगे तो पाएंगे कि बाईं तरफ की सड़क इतनी कट चुकी है कि पैदल चलने तक का रास्ता नहीं बचा है।

ये तस्वीर पहली तस्वीर से थोड़ा पहले खींची गई है। यहां दायीं तरफ सड़क टूट चुकी है।
 तस्वीर में आप देख सकते हैं सड़क टूट कर किस तरह संकरी हो गई है।
ये छतहार-तारापुर सड़क की सबसे डरावनी तस्वीरों में एक है। 15 साल पहले आई बाढ़ में जब पानी छतहार तक घुस गया था तो ये सड़क कट गई थी। तब से इसकी मरम्मत नहीं हुई है। दायीं ओर करीब तीन फुट गहरा गड्ढा है जो घास से ढंका हुआ है। शाम के अंधेरे में यहां कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
 नीतीश बाबू, ये तस्वीर देखिये और बताइये इसमें सड़क कहां है। आप बता दें तो हम आपके सुशासन के दावे को मान लेंगे।
 जर्जर सड़क का एक और नमूना पेश है। सड़क बुरी तरह कट चुकी है। नीचे गहरा गड्ढा। यहां से गुजरना जोखिम से कम नहीं।
पूरे रास्ते में ज्यादातर जगहों पर फुटपाथ और सड़क के बीच करीब एक-डेढ़ फीट  का अंतर आ चुका है। ऐसे में अक्सर यहां रिक्शा या वाहन पलटने के हादसे होते रहते हैं।
 यहां तो सड़क ही खत्म हो चुकी है। किसी तरह गांव वालों के प्रयास से मिट्ठीभर चलने के लायक बनाया गया है।
 ये नदी के पार मोहनगंज से पहले की सड़क है। तारकोल उतर चुका है। अब सिर्फ मिट्टी ही मिट्टी है। गड्ढों की तो पूछिये ही मत।
 मोहनगंज में प्रवेश से ठीक पहले की है ये तस्वीर। सड़क संकीर्ण और जर्जर है। फुटपाथ और सड़क के बीच लेवल इतना असामान्य है कि जब आमने-सामने से दो वाहनों को गुजरना हो तो लंबा जाम लग जाता है क्योंकि कोई अपनी गाड़ी नीचे नहीं उतारना चाहता। इसी वजह से अक्सर यहां लंबा जाम लगा रहता है। आपकी जानकारी के लिए ये बता दूं कि सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कांवड़ियों का ये नया रूट है। इतनी पौराणिक और धार्मिक यात्रा के मार्ग का ये हाल.. आप देश में बिहार की कौन सी तस्वीर पेश करना चाहते हैं नीतीश बाबू।
मुख्यमंत्री जी, ये हाल तब है जब तारापुर विधानसभा में आपकी ही पार्टी की नीता चौधरी विधायक हैं। नदी से मोहनगंज तक की सड़क  नीताजी के क्षेत्र में ही आता है। छतहार वालों की शिकायत है कि चूंकि इस मार्ग का इस्तेमाल अमरपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले छतहार और दूसरे गांव के लोग करते हैं, इसलिए नीताजी इस सड़क की सुध नहीं ले रहीं। उन्हें लगता है कि इससे उनके वोट पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि छतहार और बाकी गांव के लोग तो तारापुर वोट करने आएंगे नहीं। यानी, सीमा विवाद की भेंट चढ़ गई है ये सड़क।

 नीतीश जी, जब उम्मीदें टूटती हैं तो मन में पीड़ा होती है। यही व्यथा आज हमारे गांव के लोगों की ही है। आपसे उन्हें उम्मीदें बंधी थीं, लेकिन अब टूट चुकी हैं। यकीन मानिये पहली बार मुझे इतना दुख हुआ बिहार जाकर। पिताजी की बड़ी इच्छा थी घर पर एक कार हो। मेरी भी इच्छा थी उनकी ये ख्वाहिश पूरी कर दूं। लेकिन, इन सड़कों पर कार चलेगी कैसे? नीतीश बाबू क्या आप एक बेटे की व्यथा समझेंगे?
 लेकिन, कहते हैं ना जिंदगी चलने का नाम है। छतहार के लोगों की भी जिंदगी किसी तरह चल ही रही है इस गाड़ी की तरह, जहां जानवरों की तरह इंसान ठुंसे हुए हैं।
और आखिर में नीतीश जी, दुनिया अब बड़ी छोटी हो गई है। छतहार भले ही छोटा सा गांव है, लेकिन छतहार के लोग दुनिया के कई हिस्सों में फैले हुए हैं। वो बिहार के बाहर देख चुके हैं कि विकास क्या होता है। सड़क का मतलब क्या होता है। आप उन्हें बहला नहीं सकते। कुछ तो किया का नारा एक बार तो चल गया,लेकिन बार-बार नहीं चल सकता। अगर आप वाकई विकास के पैरोकार हैं तो मेरे गांव की इस सड़क का उद्धार कर दीजिए। मेरे लिए यही बिहार के विकास का बैरोमीटर है। उम्मीद है, किसी ना किसी माध्यम से आप तक मेरी ये व्यथा जरूर पहुंचेगी।
आपका,
हिमांशु कुमार मिश्र

Thursday, October 6, 2011

तस्वीरों में तेलडीहा मेला

बड़ुवा नदी के किनारे बना तेलडीहा मंदिर का प्रवेश द्वार
मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं का तांता
तेलडीहा मंदिर का मुख्य द्वार। मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं की भीड़ की अव्यवस्था से बचाने के लिए पहली बार मंदिर के चारों तरफ ग्रिल लगाई गई। 
इस बार तेलडीहा में पाठा बलि के लिए खास इंतजाम किया गया। उसी की सूचना देता मंदिर के बाहर लगा ये बोर्ड। 

मंदिर के बाहर जले आस्था के दीप
दर्शन के लिए पहली बार कतारों में मंदिर पहुंचे श्रद्धालु
मेले में मिठाई की दुकान
सभी फोटो -रौशन मिश्र

विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

छतहार पंचायत के समस्त सदस्यों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है। आइये आज हम संकल्प लें कि अपने अंदर की बुराई को कभी जीतने नहीं देंगे।
विजयदशमी के पावन मौके पर मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र ने छतहार के समस्त निवासियों को शुभकामनाएं दी है। श्री मिश्र ने छतहार ब्लॉग को भेजे अपने संदेश में कहा है कि विजयदशमी का त्योहार हमें याद दिलाता है कि असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई पर हमेशा जीत होती है। इसलिए हमेशा हमें अच्छाई के रास्ते पर ही चलना चाहिए। उन्होंने छतहार के लोगों से बुराई का त्याग करने की अपील की।
छतहार निवासी सरोज कुमार मिश्र, पंकज सिंह, रोशन मिश्र, मंडन मिश्र, प्रमोद कुमार मिश्र, पप्पू मिश्र ने भी छतहार ब्लॉग को विजयशमी पर बधाई संदेश भेजा है। हमें छतहार से बाहर रहनेवाले छतहार के तमाम लोगों की तरफ से संदेश मिल रहे हैं। निफ्ट दिल्ली में पढ़ाई कर रही ऋचा सेफाली, कीट्स भुवनेश्वर में कानून की छात्रा आकांक्षा मिताली, आईआईटी रुड़की के छात्र मनीष भारद्वाज, सी-वोटर में सर्वे कॉर्डिनेटर दिव्यांशु भारद्वाज, बरौनी से मनोज कुमार मिश्र, सूरत से मुरारी मिश्र, महेंद्र गढ़ से राजीव मिश्र, वसुंधरा गाजियाबाद से नीरज और सौरभ भारद्वाज, और छतहार के मशहूर फैशन डिजाइनर विकास भारद्वाज ने विजय दशमी पर छतहार के लोगों को बधाई दी है।