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Thursday, October 6, 2011

तस्वीरों में तेलडीहा मेला

बड़ुवा नदी के किनारे बना तेलडीहा मंदिर का प्रवेश द्वार
मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं का तांता
तेलडीहा मंदिर का मुख्य द्वार। मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं की भीड़ की अव्यवस्था से बचाने के लिए पहली बार मंदिर के चारों तरफ ग्रिल लगाई गई। 
इस बार तेलडीहा में पाठा बलि के लिए खास इंतजाम किया गया। उसी की सूचना देता मंदिर के बाहर लगा ये बोर्ड। 

मंदिर के बाहर जले आस्था के दीप
दर्शन के लिए पहली बार कतारों में मंदिर पहुंचे श्रद्धालु
मेले में मिठाई की दुकान
सभी फोटो -रौशन मिश्र

विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

छतहार पंचायत के समस्त सदस्यों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है। आइये आज हम संकल्प लें कि अपने अंदर की बुराई को कभी जीतने नहीं देंगे।
विजयदशमी के पावन मौके पर मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र ने छतहार के समस्त निवासियों को शुभकामनाएं दी है। श्री मिश्र ने छतहार ब्लॉग को भेजे अपने संदेश में कहा है कि विजयदशमी का त्योहार हमें याद दिलाता है कि असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई पर हमेशा जीत होती है। इसलिए हमेशा हमें अच्छाई के रास्ते पर ही चलना चाहिए। उन्होंने छतहार के लोगों से बुराई का त्याग करने की अपील की।
छतहार निवासी सरोज कुमार मिश्र, पंकज सिंह, रोशन मिश्र, मंडन मिश्र, प्रमोद कुमार मिश्र, पप्पू मिश्र ने भी छतहार ब्लॉग को विजयशमी पर बधाई संदेश भेजा है। हमें छतहार से बाहर रहनेवाले छतहार के तमाम लोगों की तरफ से संदेश मिल रहे हैं। निफ्ट दिल्ली में पढ़ाई कर रही ऋचा सेफाली, कीट्स भुवनेश्वर में कानून की छात्रा आकांक्षा मिताली, आईआईटी रुड़की के छात्र मनीष भारद्वाज, सी-वोटर में सर्वे कॉर्डिनेटर दिव्यांशु भारद्वाज, बरौनी से मनोज कुमार मिश्र, सूरत से मुरारी मिश्र, महेंद्र गढ़ से राजीव मिश्र, वसुंधरा गाजियाबाद से नीरज और सौरभ भारद्वाज, और छतहार के मशहूर फैशन डिजाइनर विकास भारद्वाज ने विजय दशमी पर छतहार के लोगों को बधाई दी है।  

तेलडीहा में नवरात्र धूमधाम से संपन्न

महानवमी के दिन करीब दस हजार पाठा बलि के साथ ही तेलडीहा में परंपरागत हर्षोल्लास के साथ नवरात्र का समापन हो गया। महानवमी के दिन बुधवार को सुबह साढ़े 11 बजे से ही बलि की शुरुआत हो गई थी और देर रात डेढ़ बजे तक जारी रहा। पहले मेढ़पति और उनके परिवार के लोगों ने पाठा बलि दी, इसके बाद आम लोगों की बारी आई। पिछले साल नवमी पर पाठा बलि के दौरान मची भगदड़ से सबक लेते हुए इस बार मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए थे। बड़ुवा नदी के छोर पर बने राजराजेश्वरी द्वार से मंदिर तक बैरिकेटिंग का इंतजाम किया गया था। बैरिकेटिंग के सहारे लोग पाठा लेकर कतार में मंदिर तक पहुंच रहे थे। तेलडीहा में दर्शन और पाठा बलि के लिए कतार का इंतजाम पहली बार किया गया था और काफी कामयाब भी रहा। छतहार निवासी विनोद ठाकुर के मुताबिक शानदार इंतजाम होने की वजह से पहली बार कोई बच्चा भी अकेले पाठा कटवाकर घर लौट सका। इससे पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी
ये पहला मौका है जब तेलडीहा में गैर किसी झगड़े के पाठा बलि शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। गौरतलब है कि पिछले साल अपना पाठा पहले कटवाने के चक्कर में मंदिर परिसर भगदड़ मच गई थी, जिसमें पांच से ज्यादा श्रद्धालुओं और सैंकड़ों पाठे की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद जिलाधिकारी ने जिले के सभी मंदिरों में पाठा बलि को प्रतिबंधित कर किया था, लेकिन इलाके के लोगों की मांग और सांसद पुतुल कुमारी के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन ने शर्तों के साथ पाठा बलि को मंजूरी दे दी।
इन्हीं शर्तों के तहत तमाम व्यवस्था पर निगरानी के लिए एक समिति बनाई गई। मंदिर प्रशासन से साफ कहा गया कि किसी भी हादसे के लिए वो जिम्मेदार होंगे। साथ ही इलाके के कुछ दबंग बलि के दौरान मनमानी ना करें, इसे रोकने के लिए पुलिस बल की भी तैनाती की गई। शंभूगंज के थानाध्यक्ष बासुकीनाथ झा खुद पूरे इंतजाम की निगरानी कर रहे थे। इसके अलावा छतहार के मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र भी वहां पाठा बलि के दौरान पूरे वक्त मौजूद रहे।
पाठा बलि शांतिपूर्वक संपन्न होने पर जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। छतहार के मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र के मुताबिक ऐसा पहली बार हुआ है कि नवमी देर रात तक पाठा बलि संपन्न हो गया, जिसकी वजह से विजयदशमी के दिन श्रद्धालु आराम से तेलडीहा महारानी के दर्शन कर सकेंगे। इससे पहले दशमी के दोपहर तक बलि का कार्यक्रम चलता रहता था, जिसकी वजह से श्रद्धालुओं के लिए विजयदशमी के दिन मां के दर्शन करना मुश्किल होता था।

Wednesday, September 28, 2011

धूमधाम से शुरू हुआ नवरात्र

शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र धूमधाम से शुरू हो गया। पहले दिन देवी के शैलपूत्री रूप की पूजा की गई। पूरे गांव में सुबह से ही पूजा की सरगर्मी शुरू हो गई थी। पूजा के लिए फूल और बेल पत्र इकट्ठा करने के लिए तड़के ही लोग घरों से निकल पड़े थे। इसके लिए बच्चों और युवकों में खास उत्साह था। घरों से निकल रहे दुर्गा सप्तशती के पाठ स्वर और शंख ध्वनि से पूरे इलाके का माहौल धार्मिक बन गया। गांव के पंडितों के लिए खासतौर पर ये व्यस्त दिन रहा। पूरे नौ दिन उन्हें अलग-अलग घरों में चंडी पाठ करना होगा। 
उधर, तेलडीहा में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां के भक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर वहां पहुंच रहे थे। भक्त सुल्तानगंज से करीब बीस किलोमीटर की यात्रा पैदल तय कर तेलडीहा पहुंचे। यहां जल धारने के बाद ही भक्तों ने अपने घरों की तरफ रुख किया। बहरहाल, नवरात्र का ये पहला ही दिन था, आने वाले दिनों में तेलडीहा में भारी भीड़ जुटने का अनुमान है। खासतौर पर अष्टमी, नवमी और दशमी के रोज तो यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु जमा होते हैं।

Tuesday, September 27, 2011

नवरात्र के लिए तैयार है तेलडीहा

कल से नवरात्र शुरू हो रहा है और तेलडीहा दुर्गा मंदिर साल के सबसे बड़े मेले के आयोजन के लिए तैयार है। पिछली बार नवमी के दिन मची भगदड़ से सबक लेगे हुए इस बार व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि फिर कोई अनहोनी ना हो सके। मां के दर्शन और बलि के लिए मंदिर परिसर में मचने वाली आपाधापी से बचने के लिए इस बार पंक्ति की व्यवस्था होगी। इसके लिए बकायदा बैरिकेटिंग लगाई जा रही है। चाहे आम हो या खास देवी के दर्शन के लिए सबको लाइन में लगना होगा। इससे पहले दर्शन में मंदिर प्रबंधन की मनमानी चलती थी। वो जिसे चाहते पिछले दरवाजे से मंदिर में प्रवेश करा देते थे। इस बार वीआईपी और वीवीआईपी को भी लाइन से ही मंदिर तक पहुंचना होगा, हालांकि दर्शन में सहूलियत हो इसके लिए एक कट प्वाइंट बनाया जाएगा जहां से वो सीधे मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे। मंदिर के आसपास इस बार किसी को भी दुकान लगाने की अनुमति नहीं होगी ताकि भीड़ की वजह से कंजेशन ना हो। यही नहीं, आसपास की सड़कों को भी तीस फीट चौड़ा कर दिया गया है।
जहां तक बलि की बात है तो इस बार पहले आओ पहले बलि दिलवाओ का फॉर्मूला अपनाया गया है। यानी, किसी गांव या व्यक्ति को बलि में प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। लाइन के जरिये जिसकी बारी आएगा उसका पाठा कटेगा। अष्टमी के दिन पहले मेढ़पति के परिवार के लोग बलि देंगे इसके बाद आम लोगों की बारी आएगी। इसी तरह नवमी के दिन दोपहर एक बजे तक मेढ़पति के घरवाले बलि देंगे और फिर आम लोगों की बारी होगी।
व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन के लोग भी रहेंगे लेकिन किसी भी हादसे के लिए मंदिर प्रबंधन समिति कसूरवार ठहराया जाएगा। अबकी मंदिर परिसर में एंबुलेंस के साथ अग्निशमन वाहन भी मौजूद रहेंगे। इतना ही नहीं आपात चिकित्सा का भी पूरा इंतजाम होगा वहां। सीसीटीवी कैमरे से मंदिर परिसर की निगरानी की जाएगी। आम श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना का ख्याल रखते हुए गुलनीकुशहा निवासी रमन सिंह ने मंदिर परिसर के बाहर चबूतरा का निर्माण कराया है। उस चबूतरे पर स्थानीय पंडित पाठ करेंगे। कोई श्रद्धालु अगर खास पूजा करना चाहे तो उसके लिए यहां इंतजाम होगा।
तेलडीहा में श्रद्धालुओं की भीड़ पहली पूजा के दिन ही शुरू हो जाएगी। पहली पूजा को मां भगवती का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ेगा। श्रद्धालु सुल्तानगंज स्थित पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा से जलभरकर करीब बीस किलोमीटर की पदयात्रा कर तेलडीहा दुर्गा मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करेंगे।
चूंकि नवरात्र में तेलडीहा में हर रोज हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं इसलिए ये तय है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए पानी, चाय, शरबत का भी इंतजाम किया किया है।
इस बीच, 30 सितंबर को तीन पूजा के दिन भजन का कार्यक्रम रखा गया है। स्थानीय भजन सम्राट सुनील मिश्र देवी और उनकी मंडली भजन गाएगी। भजन संध्या का उद्घाटन स्थानीय सांसद पुतुल कुमारी करेंगी।

माता दुर्गा की आरती

मैया की लाली चुनरिया देखो जी बड सुहावन लागे जी
मांग में मैया के टीका सोहे
टीका में लरिया निराली देखो जी बड सुहावन लागे जी
माथे में मैया के विन्दिया सोहे
विन्दिया में हीरा प्यारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
कानों में मैया के झुमका सोहे
झुमका में मीना धारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
गले में मैया जी के सिकरी सोहे
सिकरी में लाकेट प्यारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
हाथों में मैया जी के कंगन सोहे
कंगन में खिलिया प्यारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
पैरों में मैया के पैजनी सोहे
पैजनी छम्मकदारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
मैया की साड़ी करे जगमग जगमग
की है शेर सवारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
माता दुर्गा जगत महारानी
तीनों लोक में नहीं इनकी सानी
शिव शिव भवानी मृडानी रुद्रानी
दुर्गति नाशिनी अम्बे देखो जी बड सुहावन लागे जी
महिषासुर मधुकैटभ मारे
सुर नर मुनि को भय से उवारे
जय जय करे दुनियां सारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
"
आरती " वंदना करूँ भक्त संग मिल
लेहो अब मोहे उवारी देखो जी बड सुहावन लागे जी
गीत- आरती मिश्र
संगीत- मनोज मिश्र
ताल- दादरा

Tuesday, September 20, 2011

आरती मिश्र के भक्ति गीत


उदीयमान गीतकार श्रीमती आरती मिश्रा
मित्रों, छतहार के मशहूर गीतकार श्री मनोज मिश्र की धर्मपत्नी श्रीमती आरती मिश्र द्वारा रचित दो भक्ति गीतों को ब्लॉग पर पेश करते हुए अति प्रसन्नता हो रही है। श्रीमती आरती मिश्र बिहार की उदीयमान गीतकारों में शुमार हैं। छतहार ब्लॉ़ग की तरफ से उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। पेश हैं श्री आरती मिश्र के दो भक्ति गीत। पहला गीत गणपति जी की वंदना है और दूसरा भगवान कृष्ण पर है।
आये गणपति द्वारे हर्षाए सखिया
हर्षाए सखिया मंगल गए सखिया
आये गणपति द्वारे हर्षाए सखिया
माता गौरी के गोद बिराजे
देवगन फूल वर्षाये सखिया , आये ---
गौरी नंदन शिव के दुलारे

चन्दन पलना माता झुलाए
देख देख मन हर्षाए सखिया , आये ---
माथे मुकुट मूषक पे बिराजे

मोदक थाल मन भाए सखिया ,आये ----
जो यह गणपति मंगल गाये

रिद्धी- सिद्दि धन पाए सखिया ,आये ----
" आरती " गाये सखी संग मिली जुली
सकल मनोरथ पाए सखिया ,आये ----

गीत - आरती मिश्र
संगीत - मनोज मिश्र