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Saturday, July 16, 2011
तीन मौतों से शाकद्वीपीय टोले में शोक
तीन दिन के भीतर तीन लोगों की मौत से छतहार के शाकद्वीपीय टोले में शोक फैल गया है। नौ जुलाई को श्री भोले मिश्र की पत्नी (पुटुक्की मिश्र की मां) का निधन हुआ। अगले रोज श्री सच्चिदानंद मिश्र भी लंबी बीमारी के बाद स्वर्ग सिधार गए। दो दिन के भीतर दो मौत के सदमे से शाकद्वीपीय समाज अभी उबरा भी नहीं था कि बोकारो से श्री महानंद मिश्र के निधन की खबर आ गई। श्री महानंद मिश्र की उम्र करीब 55 साल की थी और वो बोकारो में कार्यरत थे। छतहार ब्लॉग की तरफ तीनों मृतात्माओं को हार्दिक श्रद्धांजलि। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और मृतकों के घरवालों को दुख से लड़ने का साहस दे।
Tuesday, July 12, 2011
Saturday, May 28, 2011
जनता का सेवक हूं, कर्म ही पूजा है-मनोज मिश्र
पंचायत चुनाव में मुखिया पद पर लगातार तीसरी बार चुने जाने पर श्री मनोज मिश्र से पंचायत के तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया है। जीत के बाद छतहार ब्लॉग से एक्सक्लूसिव बातचीत में श्री मिश्र ने कहा कि वो जनता के सेवक हैं और कर्म ही उनकी पूजा है। वो पिछले दस सालों की तरह नए कार्यकाल में भी छतहार पंचायत के विकास के लिए तन-मन से काम करते रहेंगे।
श्री मिश्र ने कहा है कि उनका सपना छतहार पंचायत को देश के सबसे विकसित पंचायत के रूप में देखना चाहते हैं। इसके लिए वो जीत-तोड़ मेहनत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सरकार से पंचायतों को और मदद देने की अपील की है। श्री मिश्र लगातार तीसरी बार मुखिया बन रहे हैं लेकिन इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद उनके पांव अभी भी धरती पर टिके हैं। उन्होंने कहा कि जीत का मतलब ये नहीं जनता ने पांच साल के लिए राज चलाने का लाइसेंस दे दिया है। जीत सच्ची तभी कही जाएगी जब वो अपने काम के बूते जनता भरोसा कायम रखने में कामयाब रहेंगे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने उन्हें वोट दिया और जिन्होंने उनका विरोध किया.. सबका वो शुक्रिया अदा करते हैं क्योंकि समर्थकों से काम करने की ऊर्जा मिलती है और विरोधियों से खुद को साबित करने की चुनौती। उनकी कामयाबी का यही राज है।श्री मिश्र ने अपनी जीत के लिए जनता के साथ खासतौर पर अपनी कोर टीम के सदस्यों का शुक्रिया अदा किया। श्री मिश्र की टीम में श्री पंकज सिंह, श्री ब्रजेश मिश्र, श्री पवनानंद मिश्र, श्री दीपक सिंह, श्री मोनू मिश्र, श्री पप्पू यादव, श्री प्रकाश चौधरी, श्री छेदी चौबे, श्री बुटेरी चौधरी, श्री लखन चौधरी, श्री अजय मिश्र उर्फ नौसे, श्री शंकर तिवारी,श्री अशोक यादव, श्री श्रीकांत यादव,श्री हीरा दास, श्री कपिल दास,श्री शेखर झा, श्री प्रमोद झा, मिर्जापुर से श्री प्राणमणि मिश्र, श्री यशोधर पाठक आदि प्रमुख हैं।
श्री मिश्र के तीसरी बार मुखिया चुने जाने पर छतहार ब्लॉग पर उनके लिए लगातार बधाई संदेश आ रहे हैं। बेगूसराय से श्री मनोज कुमार मिश्र ने अपने संदेश में लिखा है-बधाई! यूं ही पंचायत का विकास करते रहिए। नोएडा में फैशन डिजाइनिंग का काम करने वाले श्री विकास मिश्र ने कहा- मनोज दा के रूप में जनता ने अपना सच्चा नुमाइंदा पा लिया है। जीत की हार्दिक बधाई। नाइजीरिया से छतहार निवासी पंकज मिश्र ने कहा है हमें मनोज जी पर गर्व है। गाजियाबाद में रहने वाले छतहार के छात्र नीरज, सौरभ और आशीष ने भी मनोज जी के मुखिया चुने पर बधाई दी है।
ब्रेकिंग न्यूज- मनोज मिश्र की हैट्रिक
छतहार पंचाय़त चुनाव का नतीजा आ गया है। शंभूगंज से अभी-अभी खबर मिली है कि वर्तमान मुखिया श्री मनोज मिश्र भारी बहुमत से चुनाव जीत गए हैं। बतौर मुखिय़ा ये उनकी लगातार तीसरी जीत है। श्री मनोज मिश्र ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी विनय खिरहरी को 404 वोटों से मात दी। श्री मिश्र को 1297 वोट मिले, जबकि श्री खिरहरी 893 वोट ही हासिल कर पाए। पंचायत समिति में जीवन सिंह 24 वोट से विजयी रहे। श्री जीवन पंचायत समिति के चुनाव में दूसरी बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। सरपंच पद पर प्रभाकर मंडल को जीत मिली।
जहा तक श्री मनोज मिश्र का सवाल है, क्षेत्र में उनकी ख्याति एक कर्मठ व्यक्ति के रूप में की जाती है। वो बेहद जुझारू किस्म के इंसान माने जाते हैं, जिनके लिए मुखिया पद का मकसद सिर्फ और सिर्फ पंचायत का विकास और गरीब-पिछड़ों को बुनियादी सुविधा देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने पहली बार मुखिया पद का चुनाव 2001 में जीता था, जब लंबे अर्से बाद बिहार में पंचायत चुनाव हुआ था।तब उन्होंने मुखिया पद पर लंबे अर्से से कायम श्री नंद किशोर सिंह को मात दी थी। नंद बाबू की ख्याति पंचायत के बड़े स्तंभ के रूप में की जाती थी,लेकिन पंचायत के विकास की लंबे अर्से तक अनदेखी और नए जोश के रूप में श्री मनोज मिश्र के उदय ने छतहार पंचायत में नंद बाबू के दबदबे को खत्म कर दिया।
2001 में मुखिया पद संभालते ही श्री मनोज मिश्र के सामने पहली चुनौती थी पंचायत संस्था में ग्रामीणों का भरोसा वापस दिलाना। उन्होंने सत्ता संभालते ही पंचायत के लिए सरकारी स्तर पर शुरू की गई तमाम योजनाओं को अमली जामा पहनाना शुरू किया। देखते ही देखते गांव में विकास की धारा बहने लगी। टूटी सड़कें पक्की हो गई हैं। मुख्य सड़क से मुहल्लों तक जाने वाली तंग गलियां चौड़ी और ईंट की हो गई। पानी की निकासी के लिए नाले का काम पूरा किया गया। छतहार के गौरव माध्यमिक विद्यालय का कायकल्प किया गया। ना सिर्फ स्कूल में नई इमारतें खड़ी हुईं बल्कि शिक्षकों की मौजूदगी भी सुनिश्चित कराई गई। ये मुखिया जी की मेहनत का ही नतीजा है आज छतहार स्कूल अपना पुराना गौरव वापस सका।
छात्रों की सुविधा के लिए शहीद विश्वनाथ पुस्तकालय को फाइलों से निकालकर जमीन पर लाया गया। आज कोई भी देख सकता है कि किस तरह राय टोली के पास शहीद विश्वनाथ गर्व से सीना ताने खड़ा है।
केंद्र और राज्य सरकार की मदद के शुरू गई मध्यान्ह भोजन योजना को सख्ती से छतहार पंचायत में लागू किया गया। आंगनबाड़ी योजना भले ही दूसरे पंचायतों में मुखिया और पंचायत सदस्यों की कमाई का जरिया बन गयी हो, लेकिन छतहार में ये योजना अभी भी कारगर तरीके से काम कर रही है। कुल मिलाकर महज पांच साल में श्री मनोज मिश्र के नेतृत्व में छतहार में वो हो गया, जिसकी कल्पना आजादी के बाद से 2001 तक किसी ने नहीं की थी। ये काम का ही नतीजा था जब श्री मिश्र 2006 पंचायत चुनाव में खड़े हुए तो भारी बहुमत से वापस जीत कर आए।
दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने छतहार पंचायत में सरकार की कई योजनाएं लागू कीं। राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी योजना नरेगा अगर कहीं अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में काम कर रही है तो वो छतहार पंचायत ही है। गर्भवती महिलाओं, कुपोषित शिशुओं, मेधावी छात्रों तमाम लोगों के लिए जितनी भी सरकारी योजनाएं हैं वो बगैर किसी घोटाले के छतहार पंचायत में काम कर रही हैं। कुल मिलाकर श्री मनोज मिश्र छतहार के विकासपुरुष साबित हुए हैं। तभी तो बगैर किसी धनबल और जातिगत आधार के पंचायत चुनाव में वो जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे। छतहार ब्लॉग की तरफ से श्री मनोज मिश्र जीत की हार्दिक बधाई। हम कामना करते हैं छतहार के विकास में वो निरंतर काम करतके रहेंगे।
जहा तक श्री मनोज मिश्र का सवाल है, क्षेत्र में उनकी ख्याति एक कर्मठ व्यक्ति के रूप में की जाती है। वो बेहद जुझारू किस्म के इंसान माने जाते हैं, जिनके लिए मुखिया पद का मकसद सिर्फ और सिर्फ पंचायत का विकास और गरीब-पिछड़ों को बुनियादी सुविधा देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने पहली बार मुखिया पद का चुनाव 2001 में जीता था, जब लंबे अर्से बाद बिहार में पंचायत चुनाव हुआ था।तब उन्होंने मुखिया पद पर लंबे अर्से से कायम श्री नंद किशोर सिंह को मात दी थी। नंद बाबू की ख्याति पंचायत के बड़े स्तंभ के रूप में की जाती थी,लेकिन पंचायत के विकास की लंबे अर्से तक अनदेखी और नए जोश के रूप में श्री मनोज मिश्र के उदय ने छतहार पंचायत में नंद बाबू के दबदबे को खत्म कर दिया।
2001 में मुखिया पद संभालते ही श्री मनोज मिश्र के सामने पहली चुनौती थी पंचायत संस्था में ग्रामीणों का भरोसा वापस दिलाना। उन्होंने सत्ता संभालते ही पंचायत के लिए सरकारी स्तर पर शुरू की गई तमाम योजनाओं को अमली जामा पहनाना शुरू किया। देखते ही देखते गांव में विकास की धारा बहने लगी। टूटी सड़कें पक्की हो गई हैं। मुख्य सड़क से मुहल्लों तक जाने वाली तंग गलियां चौड़ी और ईंट की हो गई। पानी की निकासी के लिए नाले का काम पूरा किया गया। छतहार के गौरव माध्यमिक विद्यालय का कायकल्प किया गया। ना सिर्फ स्कूल में नई इमारतें खड़ी हुईं बल्कि शिक्षकों की मौजूदगी भी सुनिश्चित कराई गई। ये मुखिया जी की मेहनत का ही नतीजा है आज छतहार स्कूल अपना पुराना गौरव वापस सका।
छात्रों की सुविधा के लिए शहीद विश्वनाथ पुस्तकालय को फाइलों से निकालकर जमीन पर लाया गया। आज कोई भी देख सकता है कि किस तरह राय टोली के पास शहीद विश्वनाथ गर्व से सीना ताने खड़ा है।
केंद्र और राज्य सरकार की मदद के शुरू गई मध्यान्ह भोजन योजना को सख्ती से छतहार पंचायत में लागू किया गया। आंगनबाड़ी योजना भले ही दूसरे पंचायतों में मुखिया और पंचायत सदस्यों की कमाई का जरिया बन गयी हो, लेकिन छतहार में ये योजना अभी भी कारगर तरीके से काम कर रही है। कुल मिलाकर महज पांच साल में श्री मनोज मिश्र के नेतृत्व में छतहार में वो हो गया, जिसकी कल्पना आजादी के बाद से 2001 तक किसी ने नहीं की थी। ये काम का ही नतीजा था जब श्री मिश्र 2006 पंचायत चुनाव में खड़े हुए तो भारी बहुमत से वापस जीत कर आए।
दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने छतहार पंचायत में सरकार की कई योजनाएं लागू कीं। राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी योजना नरेगा अगर कहीं अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में काम कर रही है तो वो छतहार पंचायत ही है। गर्भवती महिलाओं, कुपोषित शिशुओं, मेधावी छात्रों तमाम लोगों के लिए जितनी भी सरकारी योजनाएं हैं वो बगैर किसी घोटाले के छतहार पंचायत में काम कर रही हैं। कुल मिलाकर श्री मनोज मिश्र छतहार के विकासपुरुष साबित हुए हैं। तभी तो बगैर किसी धनबल और जातिगत आधार के पंचायत चुनाव में वो जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे। छतहार ब्लॉग की तरफ से श्री मनोज मिश्र जीत की हार्दिक बधाई। हम कामना करते हैं छतहार के विकास में वो निरंतर काम करतके रहेंगे।
Tuesday, May 24, 2011
कौन बनेगा मुखिया? फैसला २७ को
छतहार पंचायत के मुखिया चुनाव के वोटों की गिनती २७ मई को होगी। उसी रोज देर रात नतीजा आने की उम्मीद है।
Thursday, April 7, 2011
मुखिया चुनाव में सिंबल बंटा
छतहार में हो रहे पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के सिंबल बांट दिए गए हैं। मौजूदा मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र को बैगन चुनाव चिन्ह मिला है। इस सिंबल पर वो २००१ में भी निर्वाचित हो चुके हैं। चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार हैं। उनके चुनाव चिन्ह इस प्रकार हैं। 1. अनीता देवी- मोतियों की माला 2. आशा देवी- ब्लैकबोर्ड 3. कुमार कृष्णानंद- कलम दवात 4. कुमार विनय- ईंट 5. नंद किशोर देव- फूल 6. मनोज कुमार मिश्र- बैगन 7. रिषी राजआनंद- ब्रश 8. शिवनंदन चौबे- चिमनी
Saturday, March 19, 2011
होली मुबारक हो
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