आपसे निवेदन
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Thursday, November 3, 2011
Saturday, October 15, 2011
नीतीश कुमार को खुला खत
आदरणीय नीतीश कुमार जी।
आपके सुशासन की बड़ी तारीफ सुनी थी। देश की मीडिया में सुर्खियां बन रही थीं आपका विकास मॉडल। भारतीय रेल के कायाकल्प में आपके पूर्ववर्ती लालू प्रसाद यादव के प्रबंधन मॉडल की तरह देश के शीर्ष मैनेजमेंट कॉलेजों में आपके प्रबंधन मॉडल पर बहस होने लगी थी। इन्हीं चर्चाओं के बूते आप बिहार में भारी बहुमत से दूसरी बार सत्ता में भी आए। बिहार के छोटे से अपने गांव से सैकड़ों मील दूर दिल्ली में बैठकर मुझे आपके सुशासन की इन तारीफों से बड़ी खुशी हो रही थी। गर्व हो रहा था कि चलो कम से कम अच्छी वजहों से सूबे से बाहर बिहार की तारीफ तो हो रही है। नहीं तो अब तक दिल्ली में बिहारी शब्द का मतलब क्या होता था इसका दर्द हम प्रवासी बिहार वाले ही जानते हैं। खैर, सुशासन के इन चर्चों को सुनते हुए मन बेसब्री से इंतजार कर रहा था बदले बिहार को देखने का। मन में बड़ी कुलबुलाहट हो रही थी कि तारापुर से अपने गांव जाने वाली सड़क का हाल देखने की, जो पिछले 25 सालों में विकास की उल्टी रफ्तार पर चल रही थी। मुझे याद है 1987-88 में बड़ुवा नदी पर महत्वाकांक्षी पुल बनकर तैयार हुआ था। तब हम अपने कार वाले रिश्तेदारों को गर्व से बताया करते थे कि चिंता के कौनो बात नै छय... अब त घर तक गाड़ी आबै छैय...1990 तक आते-आते तारापुर से छतहार तक चमचमाती पक्की सड़कें बनकर तैयार हो चुकी थीं।
लेकिन, लगता है आने वाला वक्त छतहारवालों पर बेरहम था। लालू शासन में पूरे बिहार की तरह तारापुर-छतहार की सड़क ने भी दम तोड़ दिया। आप ऊपर तस्वीरों में देख रखते हैं सड़क का हाल। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ये सड़क छतहार ही नहीं मालडा, गुलनीकुशहा, खौजरी, टीना, मिर्जापुर समेत कई गांवों के हजारों लोगों का जरिया है करीबी शहर तारापुर पहुंचने का।
खैर, लालू काल में सड़कें टूटती रहीं... परेशानियां बढ़ती रहीं.. लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। सुध लेता भी कौन पूरे बिहार का तब यही हाल तो था। बहरहाल, सुशासन के वादे के साथ आप सत्ता में आए। पूरे बिहार में कथित तौर पर सड़कों पर काम शुरू हो गया। बिहार से खबरें आने लगीं कि अब बिहार पहले वाला नहीं रहा। नीतीशजी खूब काम करा रहे हैं। पांच साल में बिहार बदल जाएगा।
मन में खुशी हुई। जब भी गांव किसी को फोन करता पूछता गांव की सड़क पर काम शुरू हुआ क्या? जवाब में हर बार ना ही मिला। सुशासन का सब्जबाग दिखाते-दिखाते आपने पांच साल पूरे कर लिए। कुछ जगहों पर सड़कें बनीं... और हमारे गांव की तरह ज्यादातर हिस्सों में बेबसी बनी रही। चुनाव आया। आपने नारा दिया कुछ तो किया। जनता ने भरोसा किया और आपको भारी बहुमत मिल गया। लेकिन, नीतीश जी आपके दूसरे कार्यकाल का सालभर होने को है और मैं आपको आपके तथाकथित सुशासन की कुछ तस्वीरें दिखाना चाहता हूं। उम्मीद है आप इस पर गौर करेंगे।
नीतीशजी, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं ये बड़ुवा पुल को छतहार से जोड़ने वाली तस्वीर है। बताने की जरुरत नहीं कि सड़क दोनों तरफ से बुरी तरह कटी हुई है और यहां थोड़ा भी संतुलन खोने का मतलब है बड़ा हादसा। गौर से आप देखेंगे तो पाएंगे कि बाईं तरफ की सड़क इतनी कट चुकी है कि पैदल चलने तक का रास्ता नहीं बचा है।
ये तस्वीर पहली तस्वीर से थोड़ा पहले खींची गई है। यहां दायीं तरफ सड़क टूट चुकी है।
तस्वीर में आप देख सकते हैं सड़क टूट कर किस तरह संकरी हो गई है।
ये छतहार-तारापुर सड़क की सबसे डरावनी तस्वीरों में एक है। 15 साल पहले आई बाढ़ में जब पानी छतहार तक घुस गया था तो ये सड़क कट गई थी। तब से इसकी मरम्मत नहीं हुई है। दायीं ओर करीब तीन फुट गहरा गड्ढा है जो घास से ढंका हुआ है। शाम के अंधेरे में यहां कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
नीतीश बाबू, ये तस्वीर देखिये और बताइये इसमें सड़क कहां है। आप बता दें तो हम आपके सुशासन के दावे को मान लेंगे।
जर्जर सड़क का एक और नमूना पेश है। सड़क बुरी तरह कट चुकी है। नीचे गहरा गड्ढा। यहां से गुजरना जोखिम से कम नहीं।
पूरे रास्ते में ज्यादातर जगहों पर फुटपाथ और सड़क के बीच करीब एक-डेढ़ फीट का अंतर आ चुका है। ऐसे में अक्सर यहां रिक्शा या वाहन पलटने के हादसे होते रहते हैं।
यहां तो सड़क ही खत्म हो चुकी है। किसी तरह गांव वालों के प्रयास से मिट्ठीभर चलने के लायक बनाया गया है।
ये नदी के पार मोहनगंज से पहले की सड़क है। तारकोल उतर चुका है। अब सिर्फ मिट्टी ही मिट्टी है। गड्ढों की तो पूछिये ही मत।
मोहनगंज में प्रवेश से ठीक पहले की है ये तस्वीर। सड़क संकीर्ण और जर्जर है। फुटपाथ और सड़क के बीच लेवल इतना असामान्य है कि जब आमने-सामने से दो वाहनों को गुजरना हो तो लंबा जाम लग जाता है क्योंकि कोई अपनी गाड़ी नीचे नहीं उतारना चाहता। इसी वजह से अक्सर यहां लंबा जाम लगा रहता है। आपकी जानकारी के लिए ये बता दूं कि सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कांवड़ियों का ये नया रूट है। इतनी पौराणिक और धार्मिक यात्रा के मार्ग का ये हाल.. आप देश में बिहार की कौन सी तस्वीर पेश करना चाहते हैं नीतीश बाबू।
मुख्यमंत्री जी, ये हाल तब है जब तारापुर विधानसभा में आपकी ही पार्टी की नीता चौधरी विधायक हैं। नदी से मोहनगंज तक की सड़क नीताजी के क्षेत्र में ही आता है। छतहार वालों की शिकायत है कि चूंकि इस मार्ग का इस्तेमाल अमरपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले छतहार और दूसरे गांव के लोग करते हैं, इसलिए नीताजी इस सड़क की सुध नहीं ले रहीं। उन्हें लगता है कि इससे उनके वोट पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि छतहार और बाकी गांव के लोग तो तारापुर वोट करने आएंगे नहीं। यानी, सीमा विवाद की भेंट चढ़ गई है ये सड़क।
नीतीश जी, जब उम्मीदें टूटती हैं तो मन में पीड़ा होती है। यही व्यथा आज हमारे गांव के लोगों की ही है। आपसे उन्हें उम्मीदें बंधी थीं, लेकिन अब टूट चुकी हैं। यकीन मानिये पहली बार मुझे इतना दुख हुआ बिहार जाकर। पिताजी की बड़ी इच्छा थी घर पर एक कार हो। मेरी भी इच्छा थी उनकी ये ख्वाहिश पूरी कर दूं। लेकिन, इन सड़कों पर कार चलेगी कैसे? नीतीश बाबू क्या आप एक बेटे की व्यथा समझेंगे?
लेकिन, कहते हैं ना जिंदगी चलने का नाम है। छतहार के लोगों की भी जिंदगी किसी तरह चल ही रही है इस गाड़ी की तरह, जहां जानवरों की तरह इंसान ठुंसे हुए हैं।
और आखिर में नीतीश जी, दुनिया अब बड़ी छोटी हो गई है। छतहार भले ही छोटा सा गांव है, लेकिन छतहार के लोग दुनिया के कई हिस्सों में फैले हुए हैं। वो बिहार के बाहर देख चुके हैं कि विकास क्या होता है। सड़क का मतलब क्या होता है। आप उन्हें बहला नहीं सकते। कुछ तो किया का नारा एक बार तो चल गया,लेकिन बार-बार नहीं चल सकता। अगर आप वाकई विकास के पैरोकार हैं तो मेरे गांव की इस सड़क का उद्धार कर दीजिए। मेरे लिए यही बिहार के विकास का बैरोमीटर है। उम्मीद है, किसी ना किसी माध्यम से आप तक मेरी ये व्यथा जरूर पहुंचेगी।
आपका,
हिमांशु कुमार मिश्र
आपके सुशासन की बड़ी तारीफ सुनी थी। देश की मीडिया में सुर्खियां बन रही थीं आपका विकास मॉडल। भारतीय रेल के कायाकल्प में आपके पूर्ववर्ती लालू प्रसाद यादव के प्रबंधन मॉडल की तरह देश के शीर्ष मैनेजमेंट कॉलेजों में आपके प्रबंधन मॉडल पर बहस होने लगी थी। इन्हीं चर्चाओं के बूते आप बिहार में भारी बहुमत से दूसरी बार सत्ता में भी आए। बिहार के छोटे से अपने गांव से सैकड़ों मील दूर दिल्ली में बैठकर मुझे आपके सुशासन की इन तारीफों से बड़ी खुशी हो रही थी। गर्व हो रहा था कि चलो कम से कम अच्छी वजहों से सूबे से बाहर बिहार की तारीफ तो हो रही है। नहीं तो अब तक दिल्ली में बिहारी शब्द का मतलब क्या होता था इसका दर्द हम प्रवासी बिहार वाले ही जानते हैं। खैर, सुशासन के इन चर्चों को सुनते हुए मन बेसब्री से इंतजार कर रहा था बदले बिहार को देखने का। मन में बड़ी कुलबुलाहट हो रही थी कि तारापुर से अपने गांव जाने वाली सड़क का हाल देखने की, जो पिछले 25 सालों में विकास की उल्टी रफ्तार पर चल रही थी। मुझे याद है 1987-88 में बड़ुवा नदी पर महत्वाकांक्षी पुल बनकर तैयार हुआ था। तब हम अपने कार वाले रिश्तेदारों को गर्व से बताया करते थे कि चिंता के कौनो बात नै छय... अब त घर तक गाड़ी आबै छैय...1990 तक आते-आते तारापुर से छतहार तक चमचमाती पक्की सड़कें बनकर तैयार हो चुकी थीं।
लेकिन, लगता है आने वाला वक्त छतहारवालों पर बेरहम था। लालू शासन में पूरे बिहार की तरह तारापुर-छतहार की सड़क ने भी दम तोड़ दिया। आप ऊपर तस्वीरों में देख रखते हैं सड़क का हाल। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ये सड़क छतहार ही नहीं मालडा, गुलनीकुशहा, खौजरी, टीना, मिर्जापुर समेत कई गांवों के हजारों लोगों का जरिया है करीबी शहर तारापुर पहुंचने का।
खैर, लालू काल में सड़कें टूटती रहीं... परेशानियां बढ़ती रहीं.. लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। सुध लेता भी कौन पूरे बिहार का तब यही हाल तो था। बहरहाल, सुशासन के वादे के साथ आप सत्ता में आए। पूरे बिहार में कथित तौर पर सड़कों पर काम शुरू हो गया। बिहार से खबरें आने लगीं कि अब बिहार पहले वाला नहीं रहा। नीतीशजी खूब काम करा रहे हैं। पांच साल में बिहार बदल जाएगा।
मन में खुशी हुई। जब भी गांव किसी को फोन करता पूछता गांव की सड़क पर काम शुरू हुआ क्या? जवाब में हर बार ना ही मिला। सुशासन का सब्जबाग दिखाते-दिखाते आपने पांच साल पूरे कर लिए। कुछ जगहों पर सड़कें बनीं... और हमारे गांव की तरह ज्यादातर हिस्सों में बेबसी बनी रही। चुनाव आया। आपने नारा दिया कुछ तो किया। जनता ने भरोसा किया और आपको भारी बहुमत मिल गया। लेकिन, नीतीश जी आपके दूसरे कार्यकाल का सालभर होने को है और मैं आपको आपके तथाकथित सुशासन की कुछ तस्वीरें दिखाना चाहता हूं। उम्मीद है आप इस पर गौर करेंगे।
नीतीशजी, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं ये बड़ुवा पुल को छतहार से जोड़ने वाली तस्वीर है। बताने की जरुरत नहीं कि सड़क दोनों तरफ से बुरी तरह कटी हुई है और यहां थोड़ा भी संतुलन खोने का मतलब है बड़ा हादसा। गौर से आप देखेंगे तो पाएंगे कि बाईं तरफ की सड़क इतनी कट चुकी है कि पैदल चलने तक का रास्ता नहीं बचा है।
ये तस्वीर पहली तस्वीर से थोड़ा पहले खींची गई है। यहां दायीं तरफ सड़क टूट चुकी है।
तस्वीर में आप देख सकते हैं सड़क टूट कर किस तरह संकरी हो गई है।
ये छतहार-तारापुर सड़क की सबसे डरावनी तस्वीरों में एक है। 15 साल पहले आई बाढ़ में जब पानी छतहार तक घुस गया था तो ये सड़क कट गई थी। तब से इसकी मरम्मत नहीं हुई है। दायीं ओर करीब तीन फुट गहरा गड्ढा है जो घास से ढंका हुआ है। शाम के अंधेरे में यहां कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
नीतीश बाबू, ये तस्वीर देखिये और बताइये इसमें सड़क कहां है। आप बता दें तो हम आपके सुशासन के दावे को मान लेंगे।
जर्जर सड़क का एक और नमूना पेश है। सड़क बुरी तरह कट चुकी है। नीचे गहरा गड्ढा। यहां से गुजरना जोखिम से कम नहीं।
पूरे रास्ते में ज्यादातर जगहों पर फुटपाथ और सड़क के बीच करीब एक-डेढ़ फीट का अंतर आ चुका है। ऐसे में अक्सर यहां रिक्शा या वाहन पलटने के हादसे होते रहते हैं।
यहां तो सड़क ही खत्म हो चुकी है। किसी तरह गांव वालों के प्रयास से मिट्ठीभर चलने के लायक बनाया गया है।
ये नदी के पार मोहनगंज से पहले की सड़क है। तारकोल उतर चुका है। अब सिर्फ मिट्टी ही मिट्टी है। गड्ढों की तो पूछिये ही मत।
मोहनगंज में प्रवेश से ठीक पहले की है ये तस्वीर। सड़क संकीर्ण और जर्जर है। फुटपाथ और सड़क के बीच लेवल इतना असामान्य है कि जब आमने-सामने से दो वाहनों को गुजरना हो तो लंबा जाम लग जाता है क्योंकि कोई अपनी गाड़ी नीचे नहीं उतारना चाहता। इसी वजह से अक्सर यहां लंबा जाम लगा रहता है। आपकी जानकारी के लिए ये बता दूं कि सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कांवड़ियों का ये नया रूट है। इतनी पौराणिक और धार्मिक यात्रा के मार्ग का ये हाल.. आप देश में बिहार की कौन सी तस्वीर पेश करना चाहते हैं नीतीश बाबू।
मुख्यमंत्री जी, ये हाल तब है जब तारापुर विधानसभा में आपकी ही पार्टी की नीता चौधरी विधायक हैं। नदी से मोहनगंज तक की सड़क नीताजी के क्षेत्र में ही आता है। छतहार वालों की शिकायत है कि चूंकि इस मार्ग का इस्तेमाल अमरपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले छतहार और दूसरे गांव के लोग करते हैं, इसलिए नीताजी इस सड़क की सुध नहीं ले रहीं। उन्हें लगता है कि इससे उनके वोट पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि छतहार और बाकी गांव के लोग तो तारापुर वोट करने आएंगे नहीं। यानी, सीमा विवाद की भेंट चढ़ गई है ये सड़क।
नीतीश जी, जब उम्मीदें टूटती हैं तो मन में पीड़ा होती है। यही व्यथा आज हमारे गांव के लोगों की ही है। आपसे उन्हें उम्मीदें बंधी थीं, लेकिन अब टूट चुकी हैं। यकीन मानिये पहली बार मुझे इतना दुख हुआ बिहार जाकर। पिताजी की बड़ी इच्छा थी घर पर एक कार हो। मेरी भी इच्छा थी उनकी ये ख्वाहिश पूरी कर दूं। लेकिन, इन सड़कों पर कार चलेगी कैसे? नीतीश बाबू क्या आप एक बेटे की व्यथा समझेंगे?
लेकिन, कहते हैं ना जिंदगी चलने का नाम है। छतहार के लोगों की भी जिंदगी किसी तरह चल ही रही है इस गाड़ी की तरह, जहां जानवरों की तरह इंसान ठुंसे हुए हैं।
और आखिर में नीतीश जी, दुनिया अब बड़ी छोटी हो गई है। छतहार भले ही छोटा सा गांव है, लेकिन छतहार के लोग दुनिया के कई हिस्सों में फैले हुए हैं। वो बिहार के बाहर देख चुके हैं कि विकास क्या होता है। सड़क का मतलब क्या होता है। आप उन्हें बहला नहीं सकते। कुछ तो किया का नारा एक बार तो चल गया,लेकिन बार-बार नहीं चल सकता। अगर आप वाकई विकास के पैरोकार हैं तो मेरे गांव की इस सड़क का उद्धार कर दीजिए। मेरे लिए यही बिहार के विकास का बैरोमीटर है। उम्मीद है, किसी ना किसी माध्यम से आप तक मेरी ये व्यथा जरूर पहुंचेगी।
आपका,
हिमांशु कुमार मिश्र
Thursday, October 6, 2011
तस्वीरों में तेलडीहा मेला
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| बड़ुवा नदी के किनारे बना तेलडीहा मंदिर का प्रवेश द्वार |
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| मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं का तांता |
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| तेलडीहा मंदिर का मुख्य द्वार। मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं की भीड़ की अव्यवस्था से बचाने के लिए पहली बार मंदिर के चारों तरफ ग्रिल लगाई गई। |
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| इस बार तेलडीहा में पाठा बलि के लिए खास इंतजाम किया गया। उसी की सूचना देता मंदिर के बाहर लगा ये बोर्ड। |
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| मंदिर के बाहर जले आस्था के दीप |
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| दर्शन के लिए पहली बार कतारों में मंदिर पहुंचे श्रद्धालु |
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| मेले में मिठाई की दुकान |
सभी फोटो -रौशन मिश्र
विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं
छतहार पंचायत के समस्त सदस्यों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है। आइये आज हम संकल्प लें कि अपने अंदर की बुराई को कभी जीतने नहीं देंगे।
विजयदशमी के पावन मौके पर मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र ने छतहार के समस्त निवासियों को शुभकामनाएं दी है। श्री मिश्र ने छतहार ब्लॉग को भेजे अपने संदेश में कहा है कि विजयदशमी का त्योहार हमें याद दिलाता है कि असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई पर हमेशा जीत होती है। इसलिए हमेशा हमें अच्छाई के रास्ते पर ही चलना चाहिए। उन्होंने छतहार के लोगों से बुराई का त्याग करने की अपील की।
विजयदशमी के पावन मौके पर मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र ने छतहार के समस्त निवासियों को शुभकामनाएं दी है। श्री मिश्र ने छतहार ब्लॉग को भेजे अपने संदेश में कहा है कि विजयदशमी का त्योहार हमें याद दिलाता है कि असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई पर हमेशा जीत होती है। इसलिए हमेशा हमें अच्छाई के रास्ते पर ही चलना चाहिए। उन्होंने छतहार के लोगों से बुराई का त्याग करने की अपील की।
छतहार निवासी सरोज कुमार मिश्र, पंकज सिंह, रोशन मिश्र, मंडन मिश्र, प्रमोद कुमार मिश्र, पप्पू मिश्र ने भी छतहार ब्लॉग को विजयशमी पर बधाई संदेश भेजा है। हमें छतहार से बाहर रहनेवाले छतहार के तमाम लोगों की तरफ से संदेश मिल रहे हैं। निफ्ट दिल्ली में पढ़ाई कर रही ऋचा सेफाली, कीट्स भुवनेश्वर में कानून की छात्रा आकांक्षा मिताली, आईआईटी रुड़की के छात्र मनीष भारद्वाज, सी-वोटर में सर्वे कॉर्डिनेटर दिव्यांशु भारद्वाज, बरौनी से मनोज कुमार मिश्र, सूरत से मुरारी मिश्र, महेंद्र गढ़ से राजीव मिश्र, वसुंधरा गाजियाबाद से नीरज और सौरभ भारद्वाज, और छतहार के मशहूर फैशन डिजाइनर विकास भारद्वाज ने विजय दशमी पर छतहार के लोगों को बधाई दी है।
तेलडीहा में नवरात्र धूमधाम से संपन्न
महानवमी के दिन करीब दस हजार पाठा बलि के साथ ही तेलडीहा में परंपरागत हर्षोल्लास के साथ नवरात्र का समापन हो गया। महानवमी के दिन बुधवार को सुबह साढ़े 11 बजे से ही बलि की शुरुआत हो गई थी और देर रात डेढ़ बजे तक जारी रहा। पहले मेढ़पति और उनके परिवार के लोगों ने पाठा बलि दी, इसके बाद आम लोगों की बारी आई। पिछले साल नवमी पर पाठा बलि के दौरान मची भगदड़ से सबक लेते हुए इस बार मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए थे। बड़ुवा नदी के छोर पर बने राजराजेश्वरी द्वार से मंदिर तक बैरिकेटिंग का इंतजाम किया गया था। बैरिकेटिंग के सहारे लोग पाठा लेकर कतार में मंदिर तक पहुंच रहे थे। तेलडीहा में दर्शन और पाठा बलि के लिए कतार का इंतजाम पहली बार किया गया था और काफी कामयाब भी रहा। छतहार निवासी विनोद ठाकुर के मुताबिक शानदार इंतजाम होने की वजह से पहली बार कोई बच्चा भी अकेले पाठा कटवाकर घर लौट सका। इससे पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी
पाठा बलि शांतिपूर्वक संपन्न होने पर जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। छतहार के मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र के मुताबिक ऐसा पहली बार हुआ है कि नवमी देर रात तक पाठा बलि संपन्न हो गया, जिसकी वजह से विजयदशमी के दिन श्रद्धालु आराम से तेलडीहा महारानी के दर्शन कर सकेंगे। इससे पहले दशमी के दोपहर तक बलि का कार्यक्रम चलता रहता था, जिसकी वजह से श्रद्धालुओं के लिए विजयदशमी के दिन मां के दर्शन करना मुश्किल होता था।
ये पहला मौका है जब तेलडीहा में गैर किसी झगड़े के पाठा बलि शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। गौरतलब है कि पिछले साल अपना पाठा पहले कटवाने के चक्कर में मंदिर परिसर भगदड़ मच गई थी, जिसमें पांच से ज्यादा श्रद्धालुओं और सैंकड़ों पाठे की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद जिलाधिकारी ने जिले के सभी मंदिरों में पाठा बलि को प्रतिबंधित कर किया था, लेकिन इलाके के लोगों की मांग और सांसद पुतुल कुमारी के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन ने शर्तों के साथ पाठा बलि को मंजूरी दे दी।
इन्हीं शर्तों के तहत तमाम व्यवस्था पर निगरानी के लिए एक समिति बनाई गई। मंदिर प्रशासन से साफ कहा गया कि किसी भी हादसे के लिए वो जिम्मेदार होंगे। साथ ही इलाके के कुछ दबंग बलि के दौरान मनमानी ना करें, इसे रोकने के लिए पुलिस बल की भी तैनाती की गई। शंभूगंज के थानाध्यक्ष बासुकीनाथ झा खुद पूरे इंतजाम की निगरानी कर रहे थे। इसके अलावा छतहार के मुखिया श्री मनोज कुमार मिश्र भी वहां पाठा बलि के दौरान पूरे वक्त मौजूद रहे।
Wednesday, September 28, 2011
धूमधाम से शुरू हुआ नवरात्र
उधर, तेलडीहा में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां के भक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर वहां पहुंच रहे थे। भक्त सुल्तानगंज से करीब बीस किलोमीटर की यात्रा पैदल तय कर तेलडीहा पहुंचे। यहां जल धारने के बाद ही भक्तों ने अपने घरों की तरफ रुख किया। बहरहाल, नवरात्र का ये पहला ही दिन था, आने वाले दिनों में तेलडीहा में भारी भीड़ जुटने का अनुमान है। खासतौर पर अष्टमी, नवमी और दशमी के रोज तो यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु जमा होते हैं।
Tuesday, September 27, 2011
नवरात्र के लिए तैयार है तेलडीहा
कल से नवरात्र शुरू हो रहा है और तेलडीहा दुर्गा मंदिर साल के सबसे बड़े मेले के आयोजन के लिए तैयार है। पिछली बार नवमी के दिन मची भगदड़ से सबक लेगे हुए इस बार व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि फिर कोई अनहोनी ना हो सके। मां के दर्शन और बलि के लिए मंदिर परिसर में मचने वाली आपाधापी से बचने के लिए इस बार पंक्ति की व्यवस्था होगी। इसके लिए बकायदा बैरिकेटिंग लगाई जा रही है। चाहे आम हो या खास देवी के दर्शन के लिए सबको लाइन में लगना होगा। इससे पहले दर्शन में मंदिर प्रबंधन की मनमानी चलती थी। वो जिसे चाहते पिछले दरवाजे से मंदिर में प्रवेश करा देते थे। इस बार वीआईपी और वीवीआईपी को भी लाइन से ही मंदिर तक पहुंचना होगा, हालांकि दर्शन में सहूलियत हो इसके लिए एक कट प्वाइंट बनाया जाएगा जहां से वो सीधे मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे। मंदिर के आसपास इस बार किसी को भी दुकान लगाने की अनुमति नहीं होगी ताकि भीड़ की वजह से कंजेशन ना हो। यही नहीं, आसपास की सड़कों को भी तीस फीट चौड़ा कर दिया गया है।
जहां तक बलि की बात है तो इस बार पहले आओ पहले बलि दिलवाओ का फॉर्मूला अपनाया गया है। यानी, किसी गांव या व्यक्ति को बलि में प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। लाइन के जरिये जिसकी बारी आएगा उसका पाठा कटेगा। अष्टमी के दिन पहले मेढ़पति के परिवार के लोग बलि देंगे इसके बाद आम लोगों की बारी आएगी। इसी तरह नवमी के दिन दोपहर एक बजे तक मेढ़पति के घरवाले बलि देंगे और फिर आम लोगों की बारी होगी।व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन के लोग भी रहेंगे लेकिन किसी भी हादसे के लिए मंदिर प्रबंधन समिति कसूरवार ठहराया जाएगा। अबकी मंदिर परिसर में एंबुलेंस के साथ अग्निशमन वाहन भी मौजूद रहेंगे। इतना ही नहीं आपात चिकित्सा का भी पूरा इंतजाम होगा वहां। सीसीटीवी कैमरे से मंदिर परिसर की निगरानी की जाएगी। आम श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना का ख्याल रखते हुए गुलनीकुशहा निवासी रमन सिंह ने मंदिर परिसर के बाहर चबूतरा का निर्माण कराया है। उस चबूतरे पर स्थानीय पंडित पाठ करेंगे। कोई श्रद्धालु अगर खास पूजा करना चाहे तो उसके लिए यहां इंतजाम होगा।
तेलडीहा में श्रद्धालुओं की भीड़ पहली पूजा के दिन ही शुरू हो जाएगी। पहली पूजा को मां भगवती का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ेगा। श्रद्धालु सुल्तानगंज स्थित पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा से जलभरकर करीब बीस किलोमीटर की पदयात्रा कर तेलडीहा दुर्गा मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करेंगे।
चूंकि नवरात्र में तेलडीहा में हर रोज हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं इसलिए ये तय है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए पानी, चाय, शरबत का भी इंतजाम किया किया है।
इस बीच, 30 सितंबर को तीन पूजा के दिन भजन का कार्यक्रम रखा गया है। स्थानीय भजन सम्राट सुनील मिश्र देवी और उनकी मंडली भजन गाएगी। भजन संध्या का उद्घाटन स्थानीय सांसद पुतुल कुमारी करेंगी।
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